Veterinary course: #05 पशु रोगों का वर्गीकरण(Classification of Animal Diseases)

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Classification of Animal Diseases

प्राथमिक पशु चिकित्सा के इस कोर्स में हम आपको पशु रोगों का वर्गीकरण के बारे में बताने वाले है कि पशु में किस-किस प्रकार के बीमारी होता है और पशु के शरीर में कहा-कहा होता है। ये जानने के बाद पशु का बीमारी Diagnosis करने में हमें और आपको आसानी होंगी।

पशु रोगों का वर्गीकरण (Classification of Animal Diseases)

चिकित्सा हेतु पशुओं के रोगों को साधारणतः छः भागों में बाँटा जा सकता है

  • बाहरी आघात और लघु शल्य चिकित्सा वाले रोग (External Injuries and Minor Surgical Diseases)

पहले ये पढ़े

1- बाहरी आघात और लघु शल्य चिकित्सा वाले रोग (Diseases of external Injuries and Minor Surgery)

पशुओं को साधारणतः बाहरी आघात वाले रोग हुआ करते हैं जिनमें लघु शल्य चिकित्सा की सहायता लेनी पड़ सकती है जैसे

(क) त्वचा आघात रोग (Diseases of Skin Injuries)

(i) कट – फट जाना और घाव या जख्म (Cuts, Abrasions and Wonds)

(ii) फोड़ा-फुन्सी (Absceses or Boils)

(iii) खून बहना (Bleeding or Haemorrhage)

(iv) जलना ( Burns)

(v) गर्दन या कन्धे का घाव (Yoke Gall )

(vi) थन का घाव (Wounds of Mammary Glands)

(ख) पैर अंगों पर आघात ( Injuries on Limbs)

(i) पाँव का घाव ( Wonds of Hoofs)

(ii) चोट-मोच (Bruies or Sprains)

(iii) जोड़ों का खिसकना (Dislocation of Joints)

(iv) अगले पैर से लंगडाना या पक्षाघात (Lameness and Paralysis of Fore limbs)

(v) हड्डी का टूटना (Fracture )

(vi) सींग का आघात ( Injuries on Horns), सींग टूटना (Broken Horn)

(ग) आँखों के रोग (Diseases of Eyes)

(i) आँखों का घाव ( Wounds of Eyes )

(ii) आँखों से पानी आना ( Wounds of Epiphoria )

(iii) आँखों की लाली (Conjenctivitis)

(iv) आँखों की सफेदी या आँखों का माडा (Opacity of Eyes)

(घ) कान के रोग (Diseases of Ears)

(i) कान का शोध (Otitis) (

(ii) कान का बहना (Otorrhoea)

(ड) नाक की चोट ( Injuries on Nose)

नाक से खून बहना (Bleeding from Nose or Epistaxis)

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2- असंक्रमक रोग (Non – Infectious Diseases)

ऐसे रोग जो छूत या संसर्ग से न फैले और संक्रमक न हों। इन्हें सामान्य रोग भी कहते हैं। जैसे

(क) पाचनतन्त्र के रोग (Diseases of Digestive System)

इनमें होने वाले मुख्य रोग निम्न हैं

(i) मुख के रोग (Diseases of Mouth) जैसे मुख प्रदाह (Stomatitis)

(ii) कंठ या ग्रसनी के रोग (Diseases of Pharynx) जैसे- ग्रसनी शोध (Pharyngitis)

(iii) ग्रास नली या भोजन नली के रोग (Diseases of Oesophagus) जैसे- भोजन नली शोध (Oesophagitis)

(iv) उदर या आमाशय रोग (Diseases of Stomach) जैसे भूख की कमी (Anorexia) अधिक खाना (Over Eating ), अफारा (Tympanitis) तथा आमाशय प्रदाह (Gastritis)

(v) आन्त्र के रोग (Diseases of Intestines) जैसे- आन्त्र शोध (Enteritis ) अतिसार या दस्त (Diarrhoea) पेचिस (Dysentery) उदरशूल (पेट दर्द ) या कौलिक (Colic) आदि ।

(vi) यकृत के रोग (Diseases of Liver) जैसे- शीतल यकृत (Congestion of Liver), ढोस यकृत (Cirrhosis of liver ), फटा यकृत ( Rupture of Liver) पाण्डु रोग (Jaundice). कामला रोग (Jaundice)

(vii) प्लीहा और अग्न्याशय के रोग (Diseases of Spleen and Pancreas) – पशुओं के इन अंगों में बहुत कम रोग होते हैं इनका पता लगाना कठिन होता है तथा उपचार भी सम्भव नहीं होता है ।

(ख) श्वसन तन्त्र के रोग (Diseases of Respiratory System)

इस तन्त्र में नाक (Nose), कण्ठ (Pharynx), स्वर-तन्त्र (Larynx), टेडुआ Trachea ( ichea), श्वसनी (Bronchi), फेफड़ा (Lungs) और श्लेष्मिका झिल्ली (Plural Membrane) के रोग होते हैं।

जैसे – नाक से खून बहना (Nasal Bleeding or Epistaxis) सर्दी, खाँसी या कफ, जुकाम (Cold-Cough), लेरेन्जाइटिस, ट्रेकाईटिस, न्यूमोनिया (Pneumonia), प्लूरीसी (Pleurisy) हॉफना (Panting) आदि ।

(ग) रक्त संचालन या रक्त परिवहन तन्त्र के रोग (Diseases of Circulatory System)

पशुओं के शरीर में रक्त वाहिनी के रूप में इनकी नलियों का जाल सारे शरीर में फैला हुआ है, इनमें लगने वाले रोग हृदय, धमनियाँ, शिराएँ और कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं तथा यह विभिन्न प्रकार के जटिल

रोग होते हैं। जैसे- एनीमिया, ल्यूकोरिया तथा हृदय सम्बन्धी रोग आदि ।

(घ) लसीका तन्त्र के रोग (Diseases of Lymphatic System)

शरीर के ऊतकों में रंगहीन द्रव होते हैं जिसे लसीका कहते हैं इसका परिवहन लसीका वाहिनी (Lymphatic Vessels) के द्वारा होता है। इसे लसीका प्रणाली (Lymphatic System) कहते हैं। लसीका वाहिनी में सूजन होने को लसीका शोध (Lymphangitis) कहते हैं।

(ड) मूत्र तन्त्र के रोग (Diseases of Urinary System)

इस तन्त्र में गुर्दा, मूत्राशय और मूत्र मार्ग में होने वाले रोग आते हैं जैसे गुर्दा प्रदाह (Nephritis), मूत्राशय प्रदाह (Cystitis), – पथरी (Calculi), खूनी पेशाब (Haematuria) आदि ।

(च) तन्त्रिका तन्त्र के रोग (Diseases of Nervous Systems)

इस तन्त्र में मस्तिष्क और उसकी झिल्ली, रीड़ नाड़ी और उसकी झिल्ली और तन्त्रिकाओं के रोग आते हैं जैसे मस्तिष्क शोध या प्रदाह (Meningitis), रीढ़ नाड़ी शोध (Myetitis) तन्त्रिका शोध (Neuritis). मिर्गी रोग (Epilepsy), मूर्छा रोग (Eclampsia) तन्त्रिका दर्द (Neuralgia) लू लगना (Sun (Stroke) आदि ।

(छ) प्रचलन तन्त्र या अस्थि पेशियों के रोग (Diseases of Locomotor System or Musculo -Skeletal System)

इस तन्त्र में अस्थि ( Bones ) संन्धि या जोड़ (Joints) और पेशियाँ (Muscles) के रोग आते हैं जैसे- सुखण्डी (Rickets). अस्थि शोध (Osteitis), सन्धि शोध (Arthritis), पेशीय शोध (Myoritis), गठिया या बात (Rheumatism or Screws ) पिछले अंग का लकवा (Paraplegia) झनका या टनका (Stringhalt) आदि ।

(ज) उपापचय या मेटाबोलिज्म के रोग (Diseases of Metabolism)

सभी जीवों के शरीर में हमेशा भौतिक और रासायनिक परिवर्तन होते हैं। दो प्रकार की क्रियाओं से मिलकर पूर्ण होती हैं

अ. उपचय (Anabolism) – इसके अर्न्तगत निर्माणकारी (Constructive) क्रियायें होती हैं।

ब. अपचय (Catabolism) – इसके अन्तर्गत विखन्डनकारी (Destrictive) क्रियाये होती हैं।

पशुओं के शरीर के इस प्रमुख आचरण (Character) उपापचय में निम्न रोग मुख्य हैं

(i) दुग्ध ज्वर (Milk Fever)

(ii) शर्करा की कमी या एसिटोनेमिया (Acetonaemia) या केटोसिस (Ketosis) या हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglyacemia)

(iii) ग्रास स्टेगर्स (Grass Staggers) या ग्रास टेटनी या लेक्टेशन टेटनी ।

(iv) एजोचूरिया (Azoturia) या मण्डे मोर्निंग सिकनेस आदि ।

(झ) गर्भावस्था के रोग (Diseases of Pregnancy)

प्रसव के पहले के रोग (Pre-parturition Diseases) – जैसे –

(i) गर्भपात (Abortion)

(ii) प्रसवारोध (Dystokia)

(iii) योनि का बाहर निकलना (Prolapse of Vagina)

प्रसव के बाद के रोग (Diseases of Post Parturition ) – जैसे –

(i) ज़ेर का रूकना या अन्दर रह जाना (Retention of Placenta)

(ii) गर्भाशय सूजन (Metritis)

(iii) योनि या गर्भाशय का बाहर निकलना (Prolapse of Vagina and Uterus )

(iv) स्तन कोप ( थनैला ) ( Mastitis)

(v) दूध की कमी (Agalactia)

(vi) नाभि हार्निया (Umbilical Hernia)

(vii) प्रसव मूर्छा ( Parturient Eclampsia)

(viii) दुग्धज्वर (Milk Fever)

(ड़) प्रजनन तन्त्र के रोग (Diseases of Reproductive System)

इस तन्त्र के रोगों का वर्णन नर तथा मादा प्रजननीय अंगों के अनुसार किया जाता है जैसे

  • नर और मादा में कभी-कभी जन्म के असामान्यता (Congenital Abnormalities) होती हैं जैसे जनन अंगों का अविकसित होना। बाँझपन का होना, नर तथा मादा किन्हीं जनन अंगों का न होना आदि ।
  • हारमोन्स की कमी से पशु में स्त्रीमद या गर्मी का न होना, नर पशु में शुक्राणुओं का न बनना, कामवासना का अव्यवस्थित होना आदि ।
  • रजस्खलन या वीर्य निर्माण में रूकावट का होना।
  • हारमोन्स की अधिकता से बिना स्त्रीमद (गर्मी) के रजस्खलन होना ।
  • पोषक तत्वों या पौष्टिक आहार की कमी से रज अथवा शुक के निर्माण में बाधा आना।
  • क्षीण निषेचन (Impaired Fertility), बार-बार गर्मी में आना (Repeated Breeding) और गर्भ का न रूकना (Non Conception) आदि ।

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